प्रधानाचार्या, प्रो0 डॉ0 अर्चना का छात्राओं के नाम संदेश ।

मेरी प्यारी बेटियाँ ।

अभी हम एक असहज स्थिति से गुजर रहे हैं । मानव जीवन संकटग्रस्त प्रतीत होता है। कोरोना दानव मानव जीवन को अपने कलेवर में समेटता मालूम पड़ रहा है, पर क्या मानव जीवन इतना अवल है कि महामारी का एक चोट उसके अस्तित्व को खतरे में डाल दे ।नहीं, मानव अस्तित्व इतने इतने सुदृढ़ आधार पर खड़ा है कि उसे दैहिक, दैविक और भौतिक- किसी प्रकार की विभिषिका हिला नहीं सकती । इसलिए अंग्रेजी के कवि हार्डी ने एक साधारण सी युवती और युवक के प्रेम को विश्व युद्ध से अधिक शाश्वत माना है । अतः मैं भी संभावनाओ से परिपूर्ण अपनी छात्राओं से यह आशा करती हूँ कि विपदा की इस घड़ी को भी वे अपनी सफलता की एक सीढ़ी बना ले । निराशा में आशा के किरण का आलोक देखना और असफलता को सफलता की कुंजी मानना जीवन उत्कर्ष का महामंत्र है। एक छोटा दीपक भी घोर तिमिर को छिन्न-भिन्न कर सकता है । मेरी होनहार प्रतिभावान प्यारी छात्राएँ हमारे देश का भविष्य आप जैसी युवा पीढ़ी के कन्धों पर ही है ।वर्तमान समय में आप सबो की दिनचर्या बदल गयी है ।इस विपरीत परिस्थिति में आप अपनी कार्य शैली मे एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें ।सुबह सुबह नित्य किॅया से निवृत्त होकर प्राणायाम, व्यायाम और ध्यान करने के पश्चात् नाश्ता वगैरह के बाद ध्यान आप ऑनलाइन वर्गाध्यापन करें ।
स्नातक एवं स्नातकोत्तर की छात्राएँ अपनी परीक्षा की तैयारी करें । आपको पता है कि हमारे महाविद्यालय में सभी विषयों की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है । आप उसमें शरीक हो और अपने शिक्षकों से पाठ्यसामगी प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक समस्याओ का समाधान कर सकती है । मैं मनोविज्ञान की शिक्षिका होने के नाते यह कहना चाहूँगी कि आप स्वाध्याय से अपने आत्मबल को सुदृढ़ बनावें ताकि नकारात्मकता आप तक नही पहुँच पाये और आपकी सोच हमेशा सकारात्मक ही हो वत्तमान समय में हम देखते हैं कि हर उम्र के लोग डिप्रेशन से ग्रस्त हो रहें है और इसका एक मात्र कारण यही नकारात्मक सोच है । अतः सकारात्मक चिंतन ही सफलता की सीढ़ी है और इसीसे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं । यही मूलमंत्र आपके वयकित्तव का सर्वागीण विकास करेगा साथ ही मैं आप सबो से यह भी गुजारिश करूंगी कि आप अपने स्वाध्याय के साथ अपनी माँ को घरेलू कामों मे भी सहयोग करें । इस बिपरीत परिस्थिति में यह एक अच्छा शुभअबसर मिला है जिसको हम विभिन्न विधाओं को सीखने के साथ साथ संतुलित भोजन पूरे परिवार के साथ मिल बैठ कर खाएं और आनंद मे बिभोर हो जाएँ । मेरी छात्राओं मेरे इस मंत्र को सदा याद रखना
निराशा का दूसरा छोर ही आशा है।तुम भी अंधकार में प्रकाश का सृजन करो।-
"है अंधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है ।"